कही आप भी इस कंबल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे सावधान रहे प्लास्टिक फाइबर से बने कंबल बीमारयो का कारण

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आजकल सर्दियों में रजाई के बजाय कम्बल का उपयोग काफी बढ़ गया है दिन भर के काम के थकान और तनाव जब रात को अच्छी नींद मिल जाये तो क्या ही कहना और जब ठंड के मौसम में हम कही से भी आते है तो सीधे कम्बल में खुस गए तो मन यही करता है बस अब बहार न निकलना पड़े। पर अगर आपको यह पता लगे की जो कम्बल आपकी सर्दी दूर कर रहा है वही कंबल आपके शरीर में पैदा होने वाली गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। तो आप का पहला रिएक्शन क्या होगा?

तो आप क्या कहेंगे? नेशनल इंडस्ट्रियल केमिकल्स नोटिफिकेशन एंड एसेसमेंट स्कीम की रिपोर्ट के अनुसार इन कम्बलो में फॉर्मलडिहाइड का इस्तेमाल किया जाता है जिससे कंबल में चमक बनी रहती है असल में यह कंबल polyester और acrylic fabrics से तैयार होता है। सबसे पहले इन दोनों के बीच के अंतर को समझते हैं।

Polyester एक प्रकार का plastic है जो कि मानव निर्मित है और यह उत्पादन में सस्ता और शून्य प्रतिशत प्राकृतिक है। पॉलिएस्टर और ऐक्रेलिक से बने कंबल में फॉर्मेल्डिहाइड और डाइमिथाइलफॉर्मामाइड जैसे हानिकारक रसायन होते हैं। ये पदार्थ लीवर की क्षति और यहाँ तक कि कैंसर के खतरे सहित संभावित स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हुए हैं।

प्लास्टिक फाइबर से बने कंबल से कैंसर और लिवर की बीमारी का भी रिस्क

वहीं अगर acrylic fabric की बात करें तो यह कंबल को छूने में soft बनाता है। यह एक natural fiber ना होकर plastic के ratio से तैयार किया जाता है। ये पॉलिमर पॉलिएक्रिलोनाइट्राइल लिक्विड से बना होता है जो पानी जैसा दिखता है। यह केमिकल साइनाइड जैसे जहर की तरह होता है। एक्रिलिक फैब्रिक में डाइमिथाइलफॉरमामाइड होता है। Skin के इस chemical के संपर्क में आने से cancer होने का भी खतरा रहता है। शरीर के भीतर पहुँचने पर यह liver को भी damage कर सकता है।

Acrylic कंबल के घंटो इस्तेमाल से इसमें मौजूद chemical सांसों में पहुँच जाते है। इससे सिर्फ भारी रहना, उल्टी आना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

लगे हाथ कुछ बातें cancer के बारे में भी जान लेते हैं। शरीर में मौजूद कोशिकाओं यानी कि cells में दो ऐसे बदलाव आ जाते हैं जो नहीं आने चाहिए तब शरीर में cancer बनता है इसमें पहला है किसी भी कोशिका का अनियंत्रित रूप से बढ़ना और दूसरा है किसी भी एक organ की cell का बहुत अधिक growth लेते हुए अपनी जगह से दूसरे organ तक फ़ैल जाना है। इन दोनों condition में cancer हो जाता है। इसके आम लक्षणों की बात की जाए तो वज़न में कमी, बुखार, भूखी कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या फिर मुंह से खून आना है। अगर किसी भी व्यक्ति को यह लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत doctor से संपर्क में आना चाहिए.

प्लास्टिक की पुरानी बोतलों से बनते हैं ये कंबल

हमारे आपके घरों में इस्तेमाल होने वाले इन कम्बलो में कंबलों में सिंथेटिक डाई का भी इस्तेमाल किया जाता है सिंथेटिक रंग: इन कंबलों में उपयोग किए जाने वाले एज़ो रंग ऐसे यौगिक उत्पन्न कर सकते हैं जो लगातार संपर्क में रहने पर रक्त कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। प्लास्टिक की बोतलों से बने ये कंबल हवा के संचलन को रोकते हैं और अधिक गर्मी का कारण बन सकते हैं, विशेष रूप से बच्चों के लिए ये जोखिम भरा हो सकता है

अब ज़रा इस पर doctors क्या कहते हैं? यह भी जान लेते हैं डॉक्टर भी कहते है कि कई बार छोटे बच्चे कंबल को मुंह से पकड़ते हैं या फिर चबाते हैं। ऐसा करने से नैनो सिल्वर जैसे बहुत छोटे कण ब्रेन में चले जाने का खतरा रहता है। ऐसे बच्चे मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं।

इसके अलावा इन दिनों electric blanket का भी trend चल रहा है। Electric blanket जिसमें electric wiring के जरिए बिजली से blanket को गर्म किया जाता है। यह दस minute के अंदर कंबल को गर्म कर देता है और बिस्तर पर लेटने पर bedsheet भी गर्म हो जाती है। इनका इस्तेमाल करना ठीक नहीं है electric blanket के ज़्यादा इस्तेमाल से short circuit और कंबल में आग लगने का risk तो रहता ही है साथ ही इस तरह के blanket में सोने का मतलब electromagnetic field के अंदर सोना जबकि electromagnetic field से हमारा exposure कम से कम होना चाहिए.

इस न केवल हमारे brain पर असर पड़ता है बल्कि शरीर में tumor बनने का भी खतरा रहता है। तो अगर आप भी अपने घरों में blanket का इस्तेमाल करते हैं तो इस तरह के blanket को use करने से बचें।

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